स्व राजेंद्र प्रसाद भगत की सौवीं जन्मतिथि पर दी गई श्रद्धांजलि।
संग्रामपुर प्रखंड एवं नगर पंचायत में शिक्षा के क्षेत्र का विकास कर आम जन को किया था शसक्त।

कुणाल भगत
संग्रामपुर,(मुंगेर)/- बिहार के प्रसिद्ध गांधीवादी नेता , शिक्षाविद एवम स्वतंत्रता सेनानी राजेंद्र प्रसाद भगत को उनके जन्म सदी यानी उनके जन्म के 100 वर्ष पूरे होने पर पुष्पांजलि अर्पित की गई। एक श्रद्धांजलि कार्यक्रम का आयोजन रामधनी भगत इंटर एवं डिग्री कॉलेज संग्रामपुर में आयोजित किया गया। अनेक गणमान्य लोगों ,आम जनता एवं कॉलेज के कर्मचारियों ने उनके चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि अर्पित की। संग्रामपुर के पूर्व प्रमुख एवम राज्य के प्रमुख शिक्षाविद आजादी के बाद से ही समाज की उन्नति के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया था। विद्यार्थी जीवन में भागलपुर में रहते हुए आजादी की लड़ाई में उनका योगदान था ।आज़ादी के बाद अपने क्षेत्र के लिए उन्होंने प्राथमिक से लेकर इंटर तक के पढ़ाई के लिए उन्होंने स्कूल एवम कॉलेजों की स्थापना में अपना प्रमुख योगदान दिया था। उन्होंने हमेशा से सांप्रदायिक सौहार्द के लिए कार्य किया जिसके लिए उन्हें कई प्रशस्ति पत्र भी सरकार के तरफ से मिला था। प्रथम राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद ने उन्हे मिलने दिल्ली भी बुलाया था। स्व राजेंद्र प्रसाद भगत हमेशा से समाज सुधार के कार्यों में लगे रहते थे। वे सामाजिक सौहार्द्र के भी प्रतीक थे। उन्होंने कई बार दंगों के समय अल्पसंख्यको को सुरक्षा दी थीं।वे हमेशा कहते थे कि शिक्षा से ही लोगो का विकास संभव है, इसलिए मैं शिक्षा का मंदिर बनवाता हूं। उन्होंने आजादी के बाद रानी प्रभावती उच्च विद्यालय बड़े संघर्ष से बंदेली राजघराना से विद्यालय खोलने के लिए लिया था, जिनका उद्घाटन प्रथम मुख्यमंत्री श्री कृष्ण सिंह जी ने किया था। उनके पुत्र मनोज कुमार भगत , ने कहा कि स्व राजेंद्र प्रसाद भगत लोअर प्राइमरी से लेकर डिग्री कॉलेज की स्थापना इस क्षेत्र में कराकर समाज को शसक्त और आत्मनिर्भर बनाने का कार्य किया है उनको युगों युगों तक याद किया जाएगा। समाज के लोग आज भी उनकी तरीफ करते नही थकते है।



