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दिल्ली में धूमधाम से मनाया गया सरदार महाराजा पापन्ना गौड़ का 315वां बलिदान दिवस समारोह।

राजीव रंजन

नई दिल्ली:- कलचुरी समाज के महान योद्धा, दक्षिण भारत के शिवाजी सरदार महाराजा पापन्ना गौड़ की 315वीं पुण्यतिथि के अवसर पर उनका बलिदान दिवस समारोह दिल्ली में अत्यंत श्रद्धा और भव्यता के साथ मनाया गया। इस ऐतिहासिक अवसर पर देशभर से सैकड़ों गणमान्य व्यक्ति, समाजसेवी एवं कलचुरी समाज के प्रतिनिधि एकत्र हुए और श्रद्धांजलि अर्पित की।

समारोह की शुरुआत दीप प्रज्वलन और पुष्पांजलि अर्पण के साथ हुई, जिसका उद्घाटन भारत सरकार के केन्द्रीय मंत्री श्रीपाद येसो नाइक, तेलंगाना सरकार के कैबिनेट मंत्री श्री पुन्नम प्रभाकर गौड़, श्री निवासन गौड़, लोकप्रिय दक्षिण भारतीय अभिनेता सुमन तलवार सहित अन्य विशिष्ट अतिथियों ने किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. रामा राव गौड़ (राष्ट्रीय अध्यक्ष) और श्री राजा नाडार (राष्ट्रीय संयोजक) द्वारा किया गया।

इस अवसर पर एडवोकेट शैलेन्द्र जायसवाल (अध्यक्ष, दिल्ली एनसीआर एवं राष्ट्रीय महासचिव, अखिल भारतीय जायसवाल सर्ववर्गीय महासभा) ने सरदार पापन्ना गौड़ के वीरतापूर्ण जीवन, गोलकुंडा क़िले की विजय तथा समाज के संगठन की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। उन्होंने अपने उद्बोधन में कलवार समाज की विविध उपजातियों को एकजुट होकर संगठित होने का आह्वान किया।

समारोह में साउथ फिल्म इंडस्ट्री के प्रख्यात अभिनेता सुमन तलवार गौड़ कलाल की उपस्थिति विशेष आकर्षण का केंद्र रही। वे तेलुगु, तमिल, मलयालम और कन्नड़ फिल्मों में अपनी दमदार भूमिकाओं के लिए प्रसिद्ध हैं। उन्होंने ‘गब्बर इज बैक’ और रजनीकांत की ‘शिवाजी: द बॉस’ जैसी फिल्मों में यादगार किरदार निभाए हैं। उनका जन्म 28 अगस्त 1959 को आंध्र प्रदेश के एक कलचुरी परिवार में हुआ था।

समारोह में हरियाणा के श्री शीशपाल अहलूवालिया, दिल्ली के श्री राजीव जायसवाल, श्री बृजेश जायसवाल, पूर्व आईजी श्री मूलचंद पावर सहित अन्य प्रमुख समाजसेवी भी उपस्थित रहे।

•कलवार जाति का ऐतिहासिक गौरव

कलवार जाति का संबंध प्राचीन हैहय वंश से माना जाता है, जो चंद्रवंशी क्षत्रिय कुल से उत्पन्न हुआ। इस वंश में सहस्त्रबाहु कार्तवीर्य अर्जुन जैसे महान योद्धा हुए, जिनके वंशजों में आगे चलकर भगवान श्रीकृष्ण और बलराम का जन्म हुआ। कलवार, कलाल या कलार जाति का प्रसार भारत के विभिन्न हिस्सों में है, जिसमें उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, बंगाल, राजस्थान, पंजाब, हरियाणा, जम्मू-कश्मीर सहित दक्षिण भारत भी शामिल है।

समाज की वर्तमान स्थिति में विविध उपजातियों—जैसे अहलूवालिया, वालिया, नाडार, गौड़ कलाल, जायसवाल, सुड़ी, शिवहरे, भगत, गुप्ता आदि—को एकजुट कर संगठित होने की आवश्यकता पर बल दिया गया। वक्ताओं ने संगठन की शक्ति और सामाजिक एकता की महत्ता को रेखांकित किया।

इस समारोह ने कलचुरी समाज को एक मंच पर लाकर उनके इतिहास, संस्कृति और सामाजिक संगठित प्रयासों को नई दिशा दी।

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