सिमुलतला-लहाबन रेलखंड बीती रात एक भयावह त्रासदी से बाल-बाल बच गया।
कुछ ही मिनटों के अंतराल ने हजारों जिंदगियों को मौत के मुँह से वापस खींच लिया।

जमुई/- 15050 गोरखपुर–कोलकाता पूर्वांचल एक्सप्रेस और आसनसोल–सीतामढ़ी मार्ग की सीमेंट लदी मालगाड़ी के बीच समय का यह संयोग किसी बड़े रेल हादसे को टाल देने में निर्णायक साबित हुआ। घटनास्थल का दृश्य आज भी उस अनदेखी तबाही की दास्तां बयान कर रहा है, जो एक क्षणिक विलंब से इतिहास में दर्ज हो सकती थी।
•कुछ मिनटों का फर्क, और बच गई हजारों जानें।
रेलवे के समय-आंकड़े इस घटना के भयावह पक्ष को स्पष्ट करते हैं। रात्रि 11:01 बजे, पूर्वांचल एक्सप्रेस सिमुलतला स्टेशन से डाउन लाइन पर पार हो चुकी थी। इसके सिर्फ एक मिनट बाद, 11:02 बजे, सीमेंट से लदी मालगाड़ी लहाबन स्टेशन से अप लाइन पर आगे बढ़ी।
कुछ ही देर बाद, सिमुलतला से लगभग 3.5 किलोमीटर और लहाबन से करीब 5.5 किलोमीटर की दूरी पर मालगाड़ी अचानक पटरी से उतर गई। उसके भारी-भरकम डब्बे उछलकर डाउन लाइन पर जा गिरे—उसी ट्रैक पर, जिस पर कुछ क्षण पहले यात्रियों से भरी पूर्वांचल एक्सप्रेस सरपट गुजर चुकी थी।
विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि पूर्वांचल एक्सप्रेस कुछ मिनट लेट होती, या मालगाड़ी कुछ मिनट पहले पटरी बदल चुकी होती, तो टक्कर इतनी भीषण होती कि जनहानि की कल्पना भी कंपकंपी पैदा कर देती।
•घटनास्थल का मंजर अब भी खौफनाक।
सीमेंट से भरी बोगियां लोहे की पटरियों को चीरते हुए दूसरी ओर जा गिरीं। डिब्बों की स्थिति यह बताने के लिए काफी थी कि यह हादसा एक बड़े रेल इतिहास की प्रस्तावना बन सकता था। रेलवे अधिकारियों के अनुसार, दुर्घटनास्थल पर डाउन लाइन पूरी तरह बाधित रही और आसपास का क्षेत्र रातभर ‘मौत के गलियारे’ की तरह दिखा।
स्थानीय लोगों का कहना है कि जिस क्षण घटनास्थल पर रेस्क्यू टीम पहुंची, वो मंजर रोंगटे खड़े कर देने वाला था—डब्बों के बीच टूटी पटरियां, उखड़ा बालास्ट और बिखरा माल इस भीषण टक्कर की संभावित त्रासदी को बयान कर रहे थे।
•बड़ा हादसा टला, जांच जारी।
रेलवे सूत्रों के अनुसार, यांत्रिक खराबी या पटरियों के तकनीकी दोष की संभावना पर जांच जारी है। राहत यह रही कि पूर्वांचल एक्सप्रेस पूरी तरह सुरक्षित निकल चुकी थी, अन्यथा यह रेलखंड एक और काले अध्याय का साक्षी बन जाता।
•परिवारों के लिए नया सवेरा।
स्थानीय निवासियों से लेकर रेलवे कर्मियों तक, हर कोई इस संयोग को ऊपरवाले की कृपा मान रहा है। सुबह की पहली किरण आज उन हजारों परिवारों के लिए उम्मीद और राहत लेकर आई, जो रात भर अनजाने में एक संभावित त्रासदी की कगार से गुजर चुके थे।



