शौक से स्वरोजगार तक: निहारिका ने रेज़िन आर्ट को बनाया अपनी पहचान का जरिया।

•यूट्यूब से मिली प्रेरणा, ऑनलाइन प्रशिक्षण के बाद एक महीने पहले शुरू किया काम; अब रचनात्मकता को दे रहीं नई उड़ान।
पटना। कला के प्रति बचपन से रुचि रखने वाली पटना की निहारिका कुमारी ने रेज़िन आर्ट को अपनी रचनात्मकता के साथ आय का जरिया बनाने की पहल की है। समस्तीपुर की मूल निवासी निहारिका नेलगभग 26 वर्ष पटना में बिताए हैं। पढ़ाई और नौकरी के कारण वह अपने शौक को समय नहीं दे पाईं लेकिन अब यहीं से उन्होंने एक नई शुरुआत की है।
• यूट्यूब वीडियो ने दिखाई नई राह।
निहारिका बताती हैं कि एक दिन अचानक यूट्यूब देखते समय उनकी नजर रेज़िन आर्ट पर पड़ी। रेज़िन से तैयार की गई खूबसूरत और आकर्षक वस्तुओं ने उनका ध्यान खींचा। इसके बाद उन्होंने इसके बारे में जानना और सीखना शुरू किया।
• ‘अगर अब नहीं, तो फिर कभी नहीं’ ने बदली दिशा।
करीब एक महीने पहले उन्होंने तय किया कि अब अपने हुनर को मौका देना चाहिए। इसके बाद उन्होंने रेज़िन आर्ट का काम शुरू किया। उनका कहना है कि शुरुआत के बाद धीरे-धीरे नए रास्ते खुलने लगे और आत्मविश्वास बढ़ा।




• क्या है रेज़िन आर्ट?
रेज़िन आर्ट में एपॉक्सी रेज़िन और हार्डनर के साथ रंग, ग्लिटर, फूल, पत्तियां, मोती और अन्य सजावटी सामग्री का इस्तेमाल कर आकर्षक वस्तुएं बनाई जाती हैं। इससे ज्वेलरी, की-चेन, कोस्टर, होम डेकोर, पूजा सामग्री, मोबाइल स्टैंड, नेम प्लेट, फ्लावर प्रिजर्वेशन और कस्टमाइज्ड गिफ्ट तैयार किए जा सकते हैं।
• रचनात्मकता को रोजगार से जोड़ने की कोशिश
निहारिका के लिए रेज़िन आर्ट सिर्फ कला नहीं, बल्कि अपनी पहचान बनाने का माध्यम है। वह इस काम को आगे बढ़ाकर अपनी अलग पहचान बनाना चाहती हैं। उन्हें उम्मीद है कि लोगों का सहयोग और प्रोत्साहन उनकी इस नई शुरुआत को मजबूती देगा। निहारिका को उम्मीद है कि लोगों का सहयोग और प्रोत्साहन उन्हें इस क्षेत्र में आगे बढ़ने में मदद करेगा और आने वाले समय में वह रेज़िन आर्ट के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाने में सफल होंगी।


