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गौड़ – कलाल समाज के महानायक महाराजा पप्पना के 316वीं आत्म बलिदान दिवस के अवसर पर संगोष्ठी एवं श्रद्धांजलि कार्यक्रम का हुआ आयोजन।

दिल्ली/- जय गौड़ – कलाल समाज तेलंगाना की राष्ट्रीय टीम द्वारा दिल्ली स्थित कांस्टीट्यूशन क्लब रफी मार्ग, नई दिल्ली में गौड़ – कलाल समाज के महानायक महाराजा पप्पना के 316वीं आत्म बलिदान दिवस के अवसर पर संगोष्ठी एवं श्रद्धांजलि, पुष्पांजलि का कार्यक्रम आयोजित किया गया।
इस अवसर पर कलाल समाज सिरमौर केंद्रीय मंत्री श्रीपाद येसो नाईक ने दीप प्रज्वलन कर , महानायक को श्रद्धांजलि पुष्पांजलि कर समारोह का शुभारंभ किया ।


तत्पश्चात कार्यक्रम के संयोजक एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ रामा राव गौड़ जय गौड़ कलाल समाज तेलंगाना ने सभी को मंच पर मंच पर आमंत्रित किया। सर्वप्रथम अखिल भारतीय जायसवाल सर्ववर्गीय के महासभा के राष्ट्रीय महासचिव एवं दिल्ली एनसीआर के अध्यक्ष एडवोकेट शैलेंद्र जायसवाल एवं अतिथियों द्वारा माननीय मंत्री जी का शाल और पुष्प कुछ देकर स्वागत किया गया ।
मंचासीन सभी अतिथियों का एवं माननीय मंत्री एवं पूर्व सांसद माननीय श्री मधु याशिकी गौड़ , पूर्व केन्द्रीय मंत्री डॉ संजय पासवान जी का अभिनंदन मेजबान संस्था द्वारा पटका पहनाकर स्वागत किया गया। सभी अतिथियों द्वारा पुष्पांजलि एवं अपनी श्रद्धांजलि महाराजा पप्पना गौड़ अर्पित की गई, इस अवसर पर गौड़ कलाल समाज द्वारा प्रकाशित ‘जय गौड़ नेशनल डायरी’ एवं महाराजा पप्पना गौड़ के ऊपर लिखी गई, एक पुस्तक का विमोचन भी माननीय मंत्री एवं सभी अतिथियों द्वारा किया गया। माननीय मंत्री जी ने अपने उद्बोधन में महाराजा पकड़ना गॉड के जीवन के बारे में बहुत विस्तृत चर्चा करते हुए कहा कि महाराजा पप्पना गौड़ एक साधारण परिवार में जन्म लेने के बाद भी समाज और देश की रक्षा के लिए मुगलों से लगभग 40 वर्षों तक संघर्ष किया एवं जन-जन के नायक बनने का सफर जिस प्रकार से उन्होंने तय किया औरंगजेब की सेना के छक्के छुड़ा दिए और दक्षिण के सभी किले इसमें गोल कुंडा का किला को अजेय रखा । उनके पराक्रम और शौर्य की गाथा दक्षिण भारत के प्रत्येक गौड़ कलाल समाज एवं पिछड़े वर्ग समाज के लिए गौरव की बात है , हमें उनके आज के आत्म बलिदान दिवस के अवसर पर यह संकल्प करना सीखना चाहिए, साधारण से और असाधारण बने जननायक महायोद्धा सरदार पप्पना गौड़ महाराज हमारे समाज के गौरव ही नहीं, पूरे देश के गौरव थे, दक्षिण के शिवाजी महाराज के तरह ही हिंदुत्व के रक्षक योद्धा थे । आज यह सीखने की जरूरत है कि हमें किस प्रकार से समाज में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करना है , समाज को संगठित करना है और संगठन और समाज को एक साथ लेकर किस प्रकार से हमें अपने उच्चतम आदर्श को स्थापित करना है । हमें यह सीख कर गए की राष्ट्र और समाज जीवन , किस प्रकार से व्यक्तिगत जीवन से ऊपर जीना चाहिए।
एडवोकेट शैलेंद्र जायसवाल ने अपने उद्बोधन में कहा जिस प्रकार से पूरे देश में कलचुरी समाज के गौरवपूर्ण इतिहास एवं समस्त महानायकों का इतिहास आज भी इतिहास के पन्नों से अदृश्य है, कभी ठीक से पढ़या और दर्शाया ही नहीं गया , उन्हें आज समाज को आगे लाना चाहिए और उनकी तिथियो पर इस तरह के आयोजन कर , पूरब से पश्चिम और उत्तर से दक्षिण के समाज को एक करने में , इन महापुरुषों की भूमिका को स्थापित कर , धर्म के आधार पर समाज को जोड़ने के लिए सभी संस्थाओं के प्रतिनिधियों को आगे आना चाहिए । आज देश में 15 करोड़ का कलचुरी समाज है, विभिन्न उपवर्गों में बटा हुआ है, हमे उप वर्ग भेदकर को तोड़कर एक सामूहिक जाति का भाव, कलाल, कलवार और कलार जाति का गौरवपूर्ण इतिहास पुनः लिखने और समझने की आवश्यकता है।
इस अवसर पर मंचासीन अतिथियों में शिक्षण जगत के श्री जय नारायण चौकसे , राजा नाडार, राजीव जायसवाल , रमेश अहलूवालिया , अमरदीप जायसवाल उड़ीसा से पधारे श्री गुरुबक्स सिंह अहलूवालिया,जय किशन कर्णवाल, किशोर भगत अनिल कुमार जायसवाल मनोज शाह सच्चिदानंद जायसवाल नीरज जायसवाल कृष्ण कांत जायसवाल गाजियाबाद, दक्षिण भारत के कई प्रमुख राजनीतिक जनप्रतिनिधि एवं देश के सैकड़ों गौड़ समाज के बंधु लगभग 300 की संख्या में लोग समाज प्रेमी उपस्थित थे ।

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