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भारत के 13वें प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह का निधन: आर्थिक सुधारों के शिल्पकार को देश का अंतिम सलाम।

राजीव रंजन

भारत के पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह का 26 दिसंबर 2024 को 92 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उन्हें उम्र संबंधी बीमारियों के चलते दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एआईआईएमएस) में भर्ती कराया गया था, जहाँ रात 9:51 बजे उन्हें मृत घोषित किया गया। उनके निधन पर राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं और अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने गहरा शोक व्यक्त किया है। भारत सरकार ने 27 दिसंबर से 7 दिनों के राष्ट्रीय शोक की घोषणा की है, जिसके दौरान सभी सरकारी कार्यक्रम रद्द रहेंगे और राष्ट्रीय ध्वज आधा झुका रहेगा।

डॉ. मनमोहन सिंह जिनका जन्म 26 सितंबर 1932 को पंजाब के गाह (अब पाकिस्तान में) में हुआ था। उन्होंने कैम्ब्रिज और ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालयों से अर्थशास्त्र में उच्च शिक्षा प्राप्त की और भारतीय अर्थव्यवस्था के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। मनमोहन सिंह ने अपनी शिक्षा में असाधारण उपलब्धियां हासिल कीं और विश्व स्तर पर भारत का नाम रोशन किया। 1991 में वित्त मंत्री के रूप में, उन्होंने आर्थिक उदारीकरण की नीतियों को लागू किया, जिससे भारतीय अर्थव्यवस्था को वैश्विक मंच पर नई दिशा मिली। 2004 से 2014 तक वे भारत के प्रधानमंत्री रहे और इस दौरान कई सामाजिक और आर्थिक सुधारों की पहल की। उनकी सादगी, विद्वता और नीतिगत दृढ़ता के लिए उन्हें हमेशा याद किया जाएगा। उनका निधन देश के लिए एक अपूरणीय क्षति है, और उनके योगदान को सदैव स्मरण किया जाएगा। डॉ. मनमोहन सिंह, भारत के 13वें प्रधानमंत्री, एक ऐसे व्यक्तित्व हैं जिन्होंने अपनी विद्वता, विनम्रता और नीतिगत निर्णयों से देश को एक नई दिशा दी। उनकी विद्वता ने उन्हें प्रतिष्ठित संस्थानों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों में कार्य करने का अवसर प्रदान किया।

1991 में जब भारत गंभीर आर्थिक संकट से गुजर रहा था, तब डॉ. सिंह ने वित्त मंत्री के रूप में एक नया इतिहास रच दिया। उन्होंने प्रधानमंत्री पी.वी. नरसिम्हा राव के नेतृत्व में भारत की अर्थव्यवस्था को उदारीकरण, वैश्वीकरण और निजीकरण की दिशा में ले जाने का साहसिक कदम उठाया। उनके द्वारा किए गए सुधारों ने भारत को आर्थिक रूप से सशक्त बनाया और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने में सक्षम बनाया।

प्रधानमंत्री के रूप में उनका कार्यकाल स्थिरता और विकास का प्रतीक माना जाता है। उन्होंने राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना, शिक्षा के अधिकार और आधार कार्ड जैसी पहलें शुरू कीं, जो भारतीय समाज के कमजोर वर्गों को मुख्यधारा में लाने के लिए अहम साबित हुईं। डॉ. सिंह एक साधारण जीवनशैली के लिए जाने जाते हैं। उनकी विनम्रता और सादगी उन्हें अन्य नेताओं से अलग बनाती है। वे राजनीति में रहते हुए भी हमेशा विवादों से दूर रहे। उनका योगदान न केवल राजनीति में बल्कि नीति निर्माण और सामाजिक विकास में भी अनुकरणीय है।

डॉ. मनमोहन सिंह का जीवन यह दर्शाता है कि कैसे विद्वता, ईमानदारी और दृढ़ता से किसी भी क्षेत्र में उत्कृष्टता प्राप्त की जा सकती है। उनका योगदान आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत रहेगा। डॉ. सिंह ने भारत को आर्थिक, सामाजिक और वैश्विक मंच पर मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनकी उपलब्धियां उन्हें भारतीय इतिहास के महानतम नेताओं में स्थान दिलाती हैं। डॉ. मनमोहन सिंह का योगदान केवल उनके कार्यकाल तक सीमित नहीं है। उन्होंने एक ऐसा भारत गढ़ने में मदद की, जो आत्मनिर्भर और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी हो। उनके विचार, कार्य और दृष्टिकोण आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करते रहेंगे।

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