बांकाबिहारमुंगेर

2 साल बाद भी नहीं बना विद्यालय का सड़क, पगडंडी के सहारे जाते हैं छात्र–छात्राएं विद्यालय, बरसात के दिनों में कीचड़ में फिसल कर गिरते हैं बच्चे ।

राजीव रंजन
संग्रामपुर (मुंगेर)- सूबे की सरकार शिक्षा व्यवस्था में बेहतर सुधार के दावे करती है,किन्तु धरातल पर कुछ और ही बयां करती है। कुछ ऐसा ही नजारा मुंगेर जिला के प्रखंड क्षेत्र संग्रामपुर अन्तर्गत उत्क्रमित माध्यमिक विद्यालय नवगांई में देखा जा रहा है। विदित हो कि वर्ष 2012 में सरकार ने सूबे के हर पंचायत में माध्यमिक विद्यालय की स्थापना की।उसी दौर में उत्क्रमित माध्यमिक विद्यालय नवगांई की स्थापना की गई।तत्काल माध्यमिक विद्यालय का संचालन मध्य विद्यालय नवगांई में किया गया।

सरकारी भवनों के लिए दान में दी जमीन:–
नवगांई गांव के स्वर्गीय डा. नवीन प्रसाद सिंह की धर्मपत्नी के सी मरियम्मा ने सरकारी भवन जैसे विद्यालय,अस्पताल,पंचायत सरकार भवन व पैक्स गोदाम निर्माण के लिए अपनी 2.25 एकड़ जमीन राज्यपाल के नाम निबंधित कर सरकारी भवन निर्माण का मार्ग प्रशस्त कर दिया।
विद्यालय तक सड़क निर्माण के लिए जमीन उपलब्ध :-
जब सरकारी भवन के लिए जमीन उपलब्ध हो गया तो नवगांई पैक्स अध्यक्ष सत्यानंद सिंह व अन्य ग्रमीण ने अपने– अपने जमीन में 12 फुट चौड़ी सडक निर्माण के लिए भी जमीन राज्यपाल के नाम निबंधित कर दिया।

विद्यालय भवन का निर्माण :-
वर्ष 2021 में माध्यमिक विद्यालय भवन का निर्माण कार्य शुरू किया गया।वर्ष 2022 में विद्यालय भवन का निर्माण पूर्ण हो गया। जिसकी प्राक्कलन राशि लगभग 1,36,00000/– रुo थी। वर्ष 2022 से इस नवनिर्मित भवन में पठन–पाठन का कार्य शुरू हो गया। विद्यालय भवन निर्माण के बाद नवगांई के अलावे आस पास गांव के छात्र– छात्राओं ने विद्यालय में सहर्ष नामांकन कराया। वर्तमान में इस विद्यालय में लगभग 250 छात्र छात्राऐं नामांकित हैं,जिसे पढ़ाने के लिए विषयवार शिक्षक– शिक्षिका नियुक्त किए गए हैं। बावजूद विद्यालय आने–जाने के लिए सड़क का नहीं होना छात्र– छात्राओं के लिए परेशानी का सबब बना हुआ है। जिससे विद्यालय आने वाले शिक्षक– शिक्षिकाओं व छात्र–छात्राओं को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है।खासकर बरसात के दिनों में परेशानी और अधिक बढ़ जाती है।पगडंडी रास्ते से विद्यालय आना–जाना शिक्षकों के साथ–साथ बच्चों की मजबूरी हो जाती है। कभी कभी तो फिसलन भरी पगडंडी रास्ते में फिसल कर गिर भी जाते हैं, जिस कारण उनके स्कूल ड्रेस भी गंदे हो जाते हैं।यहां तक कि छात्राऐं अपनी साइकिल से विद्यालय आ–जा नहीं सकती है। कमोवेश यही परेशानी शिक्षक–शिक्षिकाओं के साथ भी है।

कहते हैं ग्रामीण :-
सेवानिवृत्त शिक्षक निरंजन सिंह ने विद्यालय तक सड़क निर्माण नहीं होने से शिक्षक–शिक्षिकांओं व छात्र–छात्राओं के आवागमन में होने वाली परेशानी से आहत हैं। उन्होंने कहा कि विद्यालय तक अनिवार्य रूप से सड़क निर्माण होना चाहिए। वहीं शिक्षक प्रफुल्ल कुमार सिंह ने कहा कि खासकर बरसात के दिनों में छात्र–छात्राओं, शिक्षक–शिक्षिकाओं को सडक निर्माण नहीं होने से परेशानियों का सामना करना मजबूरी होती है। विद्यालय तक सड़क निर्माण की नितान्त आवशयकता है, जिसे प्राथमिकता के आधार पर निर्माण करने की जरूरत है।
कहती है छात्राऐं :–विद्यालय की छात्रा खुशी कुमारी,अनुराधा कुमारी आदि छात्राओं ने कहा कि विद्यालय में सारी सुविधाएं उपलब्ध है।अगर कठिनाई है तो सिर्फ सड़क की। छात्राओं ने बताया कि सड़क का निर्माण नहीं होने से कई तरह की परेशानी हमलोंगों को झेलनी पड़ती है,खासकर बरसात के दिनों में बहुत ज्यादा परेशानी होती है। सड़क से नीचे उतरने के बाद पगडंडी से बड़ी परेशानी से रास्ता तय करते हैं। पगडंडी पर फिसलन होने से फिसल भी जाते हैं।जिससे पाठ्य पुस्तक तो भींगती ही है, ड्रेस भी गंदा हो जाता है। छात्राओं ने जिलाधिकारी से इस विद्यालय की सड़क का निर्माण कराने की मांग की।

कहते हैं प्रधानाध्यापक :-
प्रभारी प्रधानाध्यापक राजीव प्रसाद श्रीवास्तव ने कहा कि विद्यालय आनेवाली सड़क के कच्ची होने से बरसात के दिन में कठिनाई होती है। पगडंडी से विद्यालय आना–जाना पड़ता है। इन्हीं परेशानियों के कारण विद्यालय में छात्र–छात्राओं की उपस्थिति कम हो जाती है। सडक निर्माण के लिए लिखित आग्रह किया है,इस विद्यालय के सड़क का निर्माण प्राथमिकता के आधार पर होना चाहिए।

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